love shayari

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बाहर से सूरज की गर्मी की तरह
अंदर से बारिश की बूंदो की तरह
क्या बोलू उसके बारे में..वो तो हैं
घने बादलो में इंद्र धनुष की तरह

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मेरी शायरी के हर अलफ़ाज़ में मैंने आपको सजाया,
मेरी यादों के हर किस्से में मैंने आपको ही पाया,
ख़ुशी हो या गम साथ, आपने हर पल निभाया
रोशन हुयी ज़िन्दगी जब से सनम आपको बनाया

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दिल की खिड़की से बाहर देखो ना कभी
बारिश की बूँदों सा है एहसास मेरा…

घनी जुल्फों की गिरह खोलो ना कभी
बहती हवाओं सा है एहसास मेरा….

छूकर देखो कभी तो मालूम होगा तुम्हें
सर्दियों की धूप सा है एहसास मेरा ।

 

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जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती है बहुत
यादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सिसकती है बहुत

पनपने नहीं देता कभी, बेदर्द सी उस ख़्वाहिश को
महसूस तुम्हें जो करने की, कोशिश करती है बहुत

दावे करती हैं ज़िन्दगी, जो हर दिन तुझे भुलाने के
किसी न किसी बहाने से, याद तुझे करती है बहुत

आहट से भी चौंक जाए, मुस्कराने से ही कतराए
मालूम नहीं क्यों ज़िन्दगी, जीने से डरती है बहुत।

 

 

 

“जाम पे जाम पीने से क्या फायदा,
शाम को पी सुबह उतर जाएगी,
अरे दो बूंद मेरे प्यार की पीले,
जिन्दगी सारी नशेमे गुज़र जाएगी”

 

लबो से चाहत की खुशबू चुराने दो
बहुत हो गया सितम, अब तो पास आने दो

ना करना जुबां से इज़हार मोहब्बत का…
बस इशारो से ही राज़-ए-दिल की बात बताने दो

हो मेहबूब तुम्हारे जैसा हसीन तो मुमकिन हैं
देख कर तुमको निगाहो में खुमार भर जाने दो

है गुज़ारिश नहीं संभालता ये इश्क़ हमसे
अब तो टूट कर बाहो में बिखर जाने दो

 

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