Love shayari

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राज़ खोल देते हैं नाजुक से इशारे अक्सर,
कितनी खामोश मोहब्बत की जुबान होती है।

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यही बहुत है कि तुमने पलट के देख लिया,
ये लुत्फ़ भी मेरी उम्मीद से कुछ ज्यादा है।

 

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उसको हर चंद अंधेरों ने निगलना चाहा,
बुझ न पाया वो मोहब्बत का दिया है शायद।

 

 

 

लम्हों में क़ैद कर दे जो सदियों की चाहतें,
हसरत रही कि ऐसा कोई अपना तलबगार हो।

आँख रखते हो तो उस आँख की तहरीर पढ़ो,
मुँह से इकरार न करना तो है आदत उसकी।

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संभाले नहीं संभलता है दिल,
मोहब्बत की तपिश से न जला,
इश्क तलबगार है तेरा चला आ,
अब ज़माने का बहाना न बना।

 

 

हसरतें मचल गई जब,
तुमको सोचा एक पल के लिए,
सोचो तब क्या होगा जब,
मिलोगे मुझे उम्र भर के लिए।

 

 

मोहब्बत नाम है जिसका वो ऐसी क़ैद है यारों,
कि उम्रें बीत जाती हैं सजा पूरी नहीं होती।

वो रख ले कहीं अपने पास हमें कैद करके,
काश कि हमसे कोई ऐसा गुनाह हो जाये।

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